वाल्मीकि रामायण 4.24.39
त्वम् च अपि माम् तस्य मम प्रियस्य प्रदास्यसे धर्मम् अवेक्ष्य वीर ।अनेन दानेन न लप्स्यसे त्वम् अधर्म योगम् मम वीर घातात्॥
tvam ca api mām tasya mama priyasya pradāsyase dharmam avekṣya vīra |anena dānena na lapsyase tvam adharma yogam mama vīra ghātāt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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