वाल्मीकि रामायण 4.30.80
न स संकुचितः पंथा येन वाली हतो गतः ।समये तिष्ठ सुग्रीव मा वालि पथम् अन्वगाः॥
na sa saṃkucitaḥ paṃthā yena vālī hato gataḥ |samaye tiṣṭha sugrīva mā vāli patham anvagāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें