वाल्मीकि रामायण 4.37.34
ते तु तेन मुहूर्तेन कपयः शीघ्र चारिणः ।किष्किंधाम् त्वरया प्राप्ताः सुग्रीवो यत्र वानरः॥
te tu tena muhūrtena kapayaḥ śīghra cāriṇaḥ |kiṣkiṃdhām tvarayā prāptāḥ sugrīvo yatra vānaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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