वाल्मीकि रामायण 4.38.21
विभज्य सततम् वीर स राजा हरिसत्तम ।हित्वा धर्मम् तथा अर्थम् च कामम् यः तु निषेवते॥
vibhajya satatam vīra sa rājā harisattama |hitvā dharmam tathā artham ca kāmam yaḥ tu niṣevate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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