वाल्मीकि रामायण 4.38.23
त्रिवर्ग फल भोक्ता च राजा धर्मेण युज्यते ।उद्योग समयः तु एष प्राप्तः शत्रु निषूदन॥
trivarga phala bhoktā ca rājā dharmeṇa yujyate |udyoga samayaḥ tu eṣa prāptaḥ śatru niṣūdana ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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