वाल्मीकि रामायण 4.5.3
इक्ष्वाकूणाम् कुले जातो रामो दशरथात्मजः ।धर्मे निगदितः च एव पितुर् निर्देश कारकः॥
ikṣvākūṇām kule jāto rāmo daśarathātmajaḥ |dharme nigaditaḥ ca eva pitur nirdeśa kārakaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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