वाल्मीकि रामायण 4.57.16
ते वयम् दण्दकारण्यम् विचित्य सुसमाहिताः ।अज्ञानात् तु प्रविष्टाः स्म धरण्या विवृतम् बिलम्॥
te vayam daṇdakāraṇyam vicitya susamāhitāḥ |ajñānāt tu praviṣṭāḥ sma dharaṇyā vivṛtam bilam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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