वाल्मीकि रामायण 4.58.28
श्येनाः चतुर्थम् गच्छन्ति गृध्रा गच्छन्ति पंचमम् ।बल वीर्य उपपन्नानाम् रूप यौवन शालिनाम्॥
śyenāḥ caturtham gacchanti gṛdhrā gacchanti paṃcamam |bala vīrya upapannānām rūpa yauvana śālinām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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