वाल्मीकि रामायण 4.58.3
वृद्ध भावात् अपक्षत्वात् शृण्वन् तत् अपि मर्षये ।न हि मे शक्तिः अद्य अस्ति भ्रातुः वैर विमोक्षणे॥
vṛddha bhāvāt apakṣatvāt śṛṇvan tat api marṣaye |na hi me śaktiḥ adya asti bhrātuḥ vaira vimokṣaṇe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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