वाल्मीकि रामायण 4.58.34
उपायो दृश्यताम् कश्चित् लंघने लवण अंभसः ।अभिगम्य तु वैदेहीम् समृद्ध अर्था गमिष्यथ॥
upāyo dṛśyatām kaścit laṃghane lavaṇa aṃbhasaḥ |abhigamya tu vaidehīm samṛddha arthā gamiṣyatha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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