वाल्मीकि रामायण 4.58.9
जटायुषो यदि भ्राता श्रुतम् ते गदितम् मया ।आख्याहि यदि जानासि निलयम् तस्य रक्षसः॥
jaṭāyuṣo yadi bhrātā śrutam te gaditam mayā |ākhyāhi yadi jānāsi nilayam tasya rakṣasaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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