वाल्मीकि रामायण 4.6.26
हरता मैथिलीम् येन माम् च रोषयता ध्रुवम् ।आत्मनो जीवित अन्ताय मृत्यु द्वारम् अपावृतम्॥
haratā maithilīm yena mām ca roṣayatā dhruvam |ātmano jīvita antāya mṛtyu dvāram apāvṛtam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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