वाल्मीकि रामायण 4.66.10
दुहिता वानर इन्द्रस्य कुंजरस्य महात्मनः ।मानुषम् विग्रहम् कृत्वा रूप यौवन शालिनी॥
duhitā vānara indrasya kuṃjarasya mahātmanaḥ |mānuṣam vigraham kṛtvā rūpa yauvana śālinī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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