वाल्मीकि रामायण 4.66.16
सा तु तत्र एव संभ्रांता सुवृत्ता वाक्यम् अब्रवीत् ।एक पत्नी व्रतम् इदम् को नाशयितुम् इच्छति॥
sā tu tatra eva saṃbhrāṃtā suvṛttā vākyam abravīt |eka patnī vratam idam ko nāśayitum icchati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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