वाल्मीकि रामायण 4.66.23
त्वाम् अपि उपगतम् तूर्णम् अंतरीक्षम् महाकपे ।क्षिप्तम् इन्द्रेण ते वज्रम् कोप आविष्टेन तेजसा॥
tvām api upagatam tūrṇam aṃtarīkṣam mahākape |kṣiptam indreṇa te vajram kopa āviṣṭena tejasā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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