वाल्मीकि रामायण 4.66.32
त्रिविक्रमे मया तात स शैल वन कानना ।त्रिः सप्त कृत्वः पृथिवी परिक्रान्ता प्रदक्षिणम्॥
trivikrame mayā tāta sa śaila vana kānanā |triḥ sapta kṛtvaḥ pṛthivī parikrāntā pradakṣiṇam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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