वाल्मीकि रामायण 4.66.34
स इदानीम् अहम् वृद्धः परिहीन पराक्रमः ।साम्प्रतम् कालम् अस्माकम् भवान् सर्व गुण अन्वितः॥
sa idānīm aham vṛddhaḥ parihīna parākramaḥ |sāmpratam kālam asmākam bhavān sarva guṇa anvitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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