वाल्मीकि रामायण 4.66.4
अरिष्टनेमिनः पुत्रो वैनतेयो महाबलः ।गरुत्मान् इव विख्यात उत्तमः सर्व पक्षिणाम्॥
ariṣṭaneminaḥ putro vainateyo mahābalaḥ |garutmān iva vikhyāta uttamaḥ sarva pakṣiṇām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें