वाल्मीकि रामायण 4.9.26
नत्वा पादौ अहम् तस्य मुकुटेन अस्पृशम् प्रभो ।अपि वाली मम क्रोधात् न प्रसादम् चकार सः॥
natvā pādau aham tasya mukuṭena aspṛśam prabho |api vālī mama krodhāt na prasādam cakāra saḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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