वाल्मीकि रामायण 5.22.13
ततस्तां शिंशपां सीता राक्षसीभिः समावृता ।अभिगम्य विशालाक्षी तस्थौ शोकपरिप्लुता॥
tatastāṃ śiṃśapāṃ sītā rākṣasībhiḥ samāvṛtā |abhigamya viśālākṣī tasthau śokapariplutā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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