वाल्मीकि रामायण 5.22.38
ततस्त्वजामुखी नाम राक्षसी वाक्यमब्रवीत् ।विशस्येमां ततः सर्वान्समान्कुरुत पीलुकान्॥
tatastvajāmukhī nāma rākṣasī vākyamabravīt |viśasyemāṃ tataḥ sarvānsamānkuruta pīlukān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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