वाल्मीकि रामायण 5.35.4
कीदृशं तस्य संस्थानं रूपं रामस्य कीदृशम् ।कथमूरू कथं बाहू लक्ष्मणस्य च शंस मे॥
kīdṛśaṃ tasya saṃsthānaṃ rūpaṃ rāmasya kīdṛśam |kathamūrū kathaṃ bāhū lakṣmaṇasya ca śaṃsa me ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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