वाल्मीकि रामायण 5.44.4
तस्य विस्फारघोषेण धनुषो महता दिशः ।प्रदिशश्च नभश्चैव सहसा समपूर्यत॥
tasya visphāraghoṣeṇa dhanuṣo mahatā diśaḥ |pradiśaśca nabhaścaiva sahasā samapūryata ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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