वाल्मीकि रामायण 5.50.18
विमुक्तो ह्यहमस्त्रेण राक्षसैस्त्वभिपीडितः ।केनचिद्राजकार्येण संप्राप्तो ऽस्मि तवान्तिकम्॥
vimukto hyahamastreṇa rākṣasaistvabhipīḍitaḥ |kenacidrājakāryeṇa saṃprāpto 'smi tavāntikam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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