वाल्मीकि रामायण 5.52.2
वधे तस्य समाज्ञप्ते रावणेन दुरात्मना ।निवेदितवतो दौत्यं नानुमेने विभीषणः॥
vadhe tasya samājñapte rāvaṇena durātmanā |niveditavato dautyaṃ nānumene vibhīṣaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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