वाल्मीकि रामायण 5.6.43
मनो रमम् असम्बाधम् कुबेर भवनम् यथा ।नूपुराणाम् च घोषेण कान्चीनाम् निनदेन च॥
mano ramam asambādham kubera bhavanam yathā |nūpurāṇām ca ghoṣeṇa kāncīnām ninadena ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें