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वाल्मीकि रामायण 5.6.45
सुव्यूढ कक्ष्यम् हनुमान् प्रविवेश महा गृहम् ।
suvyūḍha kakṣyam hanumān praviveśa mahā gṛham |
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंसुव्यूढ कक्ष्यम् हनुमान् प्रविवेश महा गृहम् ।
suvyūḍha kakṣyam hanumān praviveśa mahā gṛham |
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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