वाल्मीकि रामायण 5.64.14
सर्वे यथा मां वक्ष्यन्ति समेत्य हरियूथपाः ।तथा ऽस्मि कर्ता कर्तव्ये भवद्भिः परवानहम्॥
sarve yathā māṃ vakṣyanti sametya hariyūthapāḥ |tathā 'smi kartā kartavye bhavadbhiḥ paravānaham ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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