वाल्मीकि रामायण 5.65.1
ततः प्रस्रवणं शैलं ते गत्वा चित्रकाननम् ।प्रणम्य शिरसा रामं लक्ष्मणं च महाबलम्॥
tataḥ prasravaṇaṃ śailaṃ te gatvā citrakānanam |praṇamya śirasā rāmaṃ lakṣmaṇaṃ ca mahābalam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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