वाल्मीकि रामायण 5.9.10
तस्य हर्म्यस्य मध्यस्थम् वेश्म च अन्यत् सुनिर्मितम् ।बहुनिर्यूह सम्कीर्णम् ददर्श पवन आत्मजः॥
tasya harmyasya madhyastham veśma ca anyat sunirmitam |bahuniryūha samkīrṇam dadarśa pavana ātmajaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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