वाल्मीकि रामायण 5.9.13
ईहा म्Rग समायुक्तैः कार्य स्वर हिरण्मयैः ।सुक्Rतैर् आचितम् स्तम्भैः प्रदीप्तम् इव च श्रिया॥
īhā mRga samāyuktaiḥ kārya svara hiraṇmayaiḥ |sukRtair ācitam stambhaiḥ pradīptam iva ca śriyā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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