वाल्मीकि रामायण 5.9.26
महत्या कुथय आस्त्रीणम् प्Rथिवी लक्षण अन्कया ।पृथिवीम् इव विस्तीर्णाम् सराष्ट्र ग्Rह मालिनीम्॥
mahatyā kuthaya āstrīṇam pRthivī lakṣaṇa ankayā |pṛthivīm iva vistīrṇām sarāṣṭra gRha mālinīm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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