वाल्मीकि रामायण 6.103.32
शस्त्रवर्णः सुपरुषो मन्दरश्मिर्दिवाकरः ।अदृश्यत कबन्धाङ्कः संसक्तो धूमकेतुना॥
śastravarṇaḥ suparuṣo mandaraśmirdivākaraḥ |adṛśyata kabandhāṅkaḥ saṃsakto dhūmaketunā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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