वाल्मीकि रामायण 6.103.36
स कृत्वा भ्रुकुटिं क्रुद्धः किञ्चित् संरक्तलोचनः ।जगाम सुमहाक्रोधं निर्दहन्निव चक्षुषा॥
sa kṛtvā bhrukuṭiṃ kruddhaḥ kiñcit saṃraktalocanaḥ |jagāma sumahākrodhaṃ nirdahanniva cakṣuṣā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें