वाल्मीकि रामायण 6.12.2
सेनापते यथा ते स्युः कृतविद्याश्चतुर्विधाः ।योधा नगररक्षायाम् तथा व्यादेष्टुमर्हसि॥
senāpate yathā te syuḥ kṛtavidyāścaturvidhāḥ |yodhā nagararakṣāyām tathā vyādeṣṭumarhasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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