वाल्मीकि रामायण 6.30.2
चाराणाम् रावणः श्रुत्वा प्राप्तम् रामम् महाबलम् ।जात उद्वेगो अभवत् किम्चित् शार्दूलम् वाक्यम् अब्रवीत्॥
cārāṇām rāvaṇaḥ śrutvā prāptam rāmam mahābalam |jāta udvego abhavat kimcit śārdūlam vākyam abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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