वाल्मीकि रामायण 6.32.16
उपशेषे महा बाहो माम् विहाय तपस्विनीम् ।प्रियाम् इव शुभाम् नारीम् पृथिवीम् पुरुष ऋषभ॥
upaśeṣe mahā bāho mām vihāya tapasvinīm |priyām iva śubhām nārīm pṛthivīm puruṣa ṛṣabha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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