वाल्मीकि रामायण 6.32.21
संश्रुतम् गृह्णता पाणिम् चरिष्यामि इति यत् त्वया ।स्मर तन् मम काकुत्स्थ नय माम् अपि दुह्खिताम्॥
saṃśrutam gṛhṇatā pāṇim cariṣyāmi iti yat tvayā |smara tan mama kākutstha naya mām api duhkhitām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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