वाल्मीकि रामायण 6.32.23
कल्याणैर् उचितम् यत् तत् परिष्वक्तम् मया एव तु ।क्रव्य अदैस् तत् शरीरम् ते नूनम् विपरिकृष्यते॥
kalyāṇair ucitam yat tat pariṣvaktam mayā eva tu |kravya adais tat śarīram te nūnam viparikṛṣyate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें