वाल्मीकि रामायण 6.32.28
मम हेतोरनार्याया अवघः पार्थिवात्मजः ।रामः सागमुत्तीर्य वीर्यवान् गोष्पदे हतः॥
mama hetoranāryāyā avaghaḥ pārthivātmajaḥ |rāmaḥ sāgamuttīrya vīryavān goṣpade hataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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