वाल्मीकि रामायण 6.32.34
एवम् लालप्यमानायाम् सीतायाम् तत्र राक्षसः ।अभिचक्राम भर्तारम् अनीकस्थः क्ऱ्त अन्जलिः॥
evam lālapyamānāyām sītāyām tatra rākṣasaḥ |abhicakrāma bhartāram anīkasthaḥ kऱta anjaliḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें