वाल्मीकि रामायण 6.32.39
स तु सर्वम् समर्थ्य एव मन्त्रिभिः क्ऱ्त्यम् आत्मनः ।सभाम् प्रविश्य विदधे विदित्वा राम विक्रमम्॥
sa tu sarvam samarthya eva mantribhiḥ kऱtyam ātmanaḥ |sabhām praviśya vidadhe viditvā rāma vikramam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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