वाल्मीकि रामायण 6.32.4
सकामा भव कैकेयि हतो अयम् कुल नन्दनः ।कुलम् उत्सादितम् सर्वम् त्वया कलह शीलया॥
sakāmā bhava kaikeyi hato ayam kula nandanaḥ |kulam utsāditam sarvam tvayā kalaha śīlayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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