वाल्मीकि रामायण 6.35.9
स्व पक्ष वर्धनम् कुर्वन् महद् ऐश्वर्यम् अश्नुते ॥हीयमानेन कर्तव्यो राज्ना सम्धिः समेन च॥
sva pakṣa vardhanam kurvan mahad aiśvaryam aśnute ||hīyamānena kartavyo rājnā samdhiḥ samena ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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