वाल्मीकि रामायण 6.43.5
एतस्मिन्नन्तरे तेषामन्योन्यमभिधावताम् ।रक्षसां वानराणां च द्वन्द्वयुद्धमवर्तत॥
etasminnantare teṣāmanyonyamabhidhāvatām |rakṣasāṃ vānarāṇāṃ ca dvandvayuddhamavartata ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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