वाल्मीकि रामायण 6.44.26
तेन शब्देन महता प्रवृद्धेन समन्ततः ।त्रिकूटः कन्दराकीर्णः प्रव्याहरदिवाचलः॥
tena śabdena mahatā pravṛddhena samantataḥ |trikūṭaḥ kandarākīrṇaḥ pravyāharadivācalaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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