वाल्मीकि रामायण 6.44.38
स रामं लक्ष्मणं चैव घोरैर्नागमयैः शरैः ।बिभेद समरे क्रुद्धः सर्वगात्रेषु राक्षसः॥
sa rāmaṃ lakṣmaṇaṃ caiva ghorairnāgamayaiḥ śaraiḥ |bibheda samare kruddhaḥ sarvagātreṣu rākṣasaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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