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वाल्मीकि रामायण 6.63.55
नन्विदं त्रिदिवं सर्वमाहारस्य न पूर्यते॥
nanvidaṃ tridivaṃ sarvamāhārasya na pūryate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंनन्विदं त्रिदिवं सर्वमाहारस्य न पूर्यते॥
nanvidaṃ tridivaṃ sarvamāhārasya na pūryate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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