वाल्मीकि रामायण 6.73.13
स शङ्खशशिवर्णेन छत्रेण रिपुसूदनः।रराज प्रतिपूर्णेन नभश्चान्द्रमसा यथा॥
sa śaṅkhaśaśivarṇena chatreṇa ripusūdanaḥ |rarāja pratipūrṇena nabhaścāndramasā yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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