वाल्मीकि रामायण 6.73.21
सकृदेव समिद्धस्य विधूमस्य महार्चिषः।बभूवुस्तानि लिङ्गानि विजयं यान्यदर्शयन्॥
sakṛdeva samiddhasya vidhūmasya mahārciṣaḥ |babhūvustāni liṅgāni vijayaṃ yānyadarśayan ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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